शैक्षिक सामग्री: डॉ. श्रद्धा चखैयार, MBBS, MRCOG (London), Shradha IVF & Maternity, पटना
नवरात्रि के पहले दिन, बिहार के लगभग हर घर में एक ही काम होता है। कलश के पास मिट्टी बिछाई जाती है, और उसमें जौ बोए जाते हैं। नौ दिन तक कोई उसे उखाड़कर नहीं देखता कि अंकुर निकला या नहीं। बस रोज़ थोड़ा पानी, थोड़ी धूप, और भरोसा। दसवें दिन वही जौ हरा-भरा होकर माँ के चरणों में चढ़ता है।
हमारे clinic में बैठे बहुत से दंपति यह काम हर साल करते हैं। पर उन्होंने शायद कभी ध्यान नहीं दिया कि यह छोटा-सा अनुष्ठान, माँ बनने के पूरे विज्ञान को अपने अंदर समेटे बैठा है: एक अच्छा बीज, तैयार मिट्टी, सही समय, और धैर्य।
इसी विचार से इस साल हमने नवरात्रि पर एक शृंखला बनाई है: नौ रूप, नौ पड़ाव। नवरात्रि की नौ रातें हैं, और गर्भ के नौ महीने। माँ दुर्गा के नौ रूप हैं, और संतान की चाह रखने वाले दंपति के सफ़र में भी लगभग नौ पड़ाव आते हैं। हर दिन की reel एक रूप और एक पड़ाव की बात करती है। यह लेख उन सब reels का घर है। जिस भी दिन की reel से आप यहाँ पहुँचे हों, पूरा सफ़र यहीं मिलेगा।
शुरू करने से पहले एक बात साफ़
यह लेख श्रद्धा और विज्ञान को आमने-सामने नहीं रखता। हमारे यहाँ आने वाले ज़्यादातर दंपति मंदिर भी जाते हैं और report भी दिखाते हैं। हमने कभी किसी से नहीं कहा कि इनमें से एक छोड़ दीजिए।
पर एक रेखा ज़रूरी है। कोई व्रत, पूजा या अनुष्ठान बाँझपन का इलाज नहीं है, और कोई इलाज भी गर्भ की गारंटी नहीं देता। देवियों की कथाएँ यहाँ इलाज नहीं, आईना हैं। वो हमें दिखाती हैं कि जिस डर, इंतज़ार और उम्मीद से आप गुज़र रहे हैं, वो हमारी संस्कृति हज़ारों साल से पहचानती आई है। और हर कथा के साथ हम वो एक व्यावहारिक कदम भी बताएँगे, जो विज्ञान कहता है।
घटस्थापना: जौ और भ्रूण, दोनों को पाँच दिन चाहिए
जौ का बीज मिट्टी में जाते ही अंकुर नहीं बन जाता। पहले वो पानी सोखता है, फिर फूलता है, फिर अंदर से टूटकर एक नन्हा अंकुर निकलता है। बाहर से कुछ दिखता नहीं, पर अंदर काम चल रहा होता है।
IVF lab में भ्रूण के साथ भी ठीक यही होता है। पहले दिन अंडे और शुक्राणु के मिलने का प्रमाण दिखता है। तीसरे दिन तक भ्रूण आम तौर पर छह से आठ कोशिकाओं का हो जाता है। और पाँचवें दिन वो blastocyst बनता है, जिसके अंदर आगे चलकर शिशु और बाहर की परत से placenta बनता है। इन पाँच दिनों में कोई जल्दी नहीं कर सकता, न बीज के साथ, न भ्रूण के साथ।
इस पड़ाव की सीख: हर विकास का अपना समय होता है। जो दिख नहीं रहा, उसका मतलब यह नहीं कि कुछ हो नहीं रहा।
पहला दिन, माँ शैलपुत्री: बीज, मिट्टी और धैर्य
माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। सती रूप में देह त्यागने के बाद वो इसी रूप में फिर से जन्मीं। इसलिए यह रूप दो बातें सिखाता है: पहाड़ जैसी मज़बूत नींव, और दोबारा शुरुआत करने का साहस।
जौ के अंकुर के लिए तीन चीज़ें चाहिए: अच्छा बीज, तैयार मिट्टी, और धैर्य। माँ बनने का विज्ञान भी इन्हीं तीन पर टिका है। यहाँ बीज है भ्रूण, जो पति और पत्नी, दोनों से मिलकर बनता है। और मिट्टी है गर्भाशय की अंदरूनी परत (endometrium), जिसे जाँचा जा सकता है और ज़रूरत हो तो इलाज से तैयार किया जा सकता है। मिट्टी का अर्थ स्त्री नहीं है, मिट्टी एक ऊतक है। इस फ़र्क़ को समझना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हमारे समाज में बच्चा न होने का दोष अक्सर बिना जाँच के सिर्फ़ पत्नी पर डाल दिया जाता है।
आज का एक कदम: नींव की जाँच, और दोनों की। पत्नी के लिए आम तौर पर thyroid, sugar, खून की कमी और एक ultrasound से शुरुआत होती है। पति के लिए semen analysis, जो एक आसान और सस्ती जाँच है। कौन-सी जाँच कब करानी है, यह आपके डॉक्टर आपकी उम्र और इतिहास देखकर तय करेंगे।
दोबारा शुरुआत करना हार नहीं है। हर सफ़र की शुरुआत एक मज़बूत नींव से होती है।
दूसरा दिन, माँ ब्रह्मचारिणी: तपस्या जो मंदिर के बाहर होती है
माँ ब्रह्मचारिणी ने वर्षों तपस्या की। उनके एक हाथ में जपमाला है, दूसरे में कमंडल। यह रूप अनुशासन और इंतज़ार का रूप है।
इलाज के दौरान दंपति की तपस्या भी कम नहीं होती। तय समय पर हर इंजेक्शन, हर दवा, बार-बार की जाँचें। और फिर embryo transfer के बाद का वो इंतज़ार, जिसे लोग “दो हफ़्ते का इंतज़ार” कहते हैं, जब हर पल भारी लगता है।
आज का एक कदम: इस इंतज़ार में खुद को सज़ा मत दीजिए। Transfer के बाद पूरी तरह बिस्तर पर लेटे रहने की ज़रूरत नहीं होती; सामान्य, हल्की दिनचर्या रखिए। बीच में घर पर बार-बार pregnancy test मत कीजिए। बहुत जल्दी किया गया test गलत तस्वीर दे सकता है, और इलाज में दिए गए कुछ hormone injections भी test को भ्रमित कर सकते हैं। खून की जाँच उसी दिन कराइए, जिस दिन आपका clinic बताए।
धैर्य भी इलाज का हिस्सा है।
तीसरा दिन, माँ चंद्रघंटा: अपने चक्र को समझिए, डर अपने आप घटेगा
माँ चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। कहते हैं, उस घंटे की ध्वनि से भय दूर होता है।
चाँद की तरह स्त्री के शरीर का भी एक चक्र है। बहुत-सी महिलाएँ मानती हैं कि ovulation हमेशा 14वें दिन होता है। सच यह है कि ovulation आम तौर पर अगले period से लगभग 14 दिन पहले होता है। अगर आपका चक्र 35 दिन का है, तो आपका ovulation 14वें दिन नहीं, उसके काफ़ी बाद होगा। इसी गलतफ़हमी में कई दंपति महीनों तक गलत दिनों पर कोशिश करते रहते हैं।
आज का एक कदम: तीन महीने तक अपने period की तारीख़ें लिखिए। अगर periods बहुत अनियमित हैं, दो महीने तक नहीं आते, या बहुत दर्द के साथ आते हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ मत कीजिए। PCOS जैसी स्थितियाँ बहुत आम हैं और इनका इलाज संभव है।
जानकारी से बड़ा कोई इलाज डर का नहीं।
चौथा दिन, माँ कूष्मांडा: सृष्टि एक अंडे से शुरू होती है
कथा है कि जब चारों ओर केवल अंधकार था, माँ कूष्मांडा की मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना हुई। इसलिए इन्हें सृष्टि की आदि-शक्ति कहा गया। हमारी परंपरा में ब्रह्मांड को “ब्रह्मांड” यानी एक अंडे के आकार का ही माना गया है।
हर स्त्री जन्म से ही अंडों का एक भंडार लेकर पैदा होती है। यह भंडार नया नहीं बनता, उम्र के साथ घटता है, और पैंतीस के बाद यह गिरावट तेज़ हो जाती है। AMH नाम की खून की जाँच और ultrasound से इस भंडार का अंदाज़ा मिलता है।
पर AMH को लेकर एक बड़ी गलतफ़हमी है। AMH अंडों की संख्या का संकेत देता है, उनकी गुणवत्ता का नहीं। कम AMH का मतलब यह नहीं कि आप माँ नहीं बन सकतीं। इसका मतलब बस इतना है कि योजना में देर नहीं करनी चाहिए।
आज का एक कदम: अगर आप तीस के बाद परिवार की योजना बना रही हैं, या बच्चा कुछ साल बाद चाहती हैं, तो एक बार अपने डॉक्टर से ovarian reserve की बात ज़रूर कीजिए।
जीवन की शुरुआत एक अंडे से होती है। उसकी कद्र समय रहते कीजिए।
पाँचवाँ दिन, माँ स्कंदमाता: गोद भरना शुरुआत है, अंत नहीं
माँ स्कंदमाता की गोद में बाल कार्तिकेय विराजते हैं। यह नवदुर्गा का अकेला रूप है जिसमें माँ अपने शिशु के साथ दिखती हैं।
बहुत से दंपति, ख़ासकर लंबे इलाज के बाद, positive report आते ही मान लेते हैं कि सफ़र पूरा हुआ। असल में वहीं से नौ महीने की देखभाल शुरू होती है। एक और भ्रम यह है कि IVF से हुई pregnancy “नाज़ुक” होती है और माँ को नौ महीने बिस्तर पर रहना चाहिए। ज़्यादातर IVF pregnancies सामान्य pregnancy की तरह ही चलती हैं। ज़रूरत है नियमित देखरेख की, डर की नहीं।
आज का एक कदम: गर्भ ठहरने से पहले ही folic acid शुरू करने की बात डॉक्टर से कीजिए। Pregnancy में कोई भी दवा, चाहे घरेलू नुस्खा ही क्यों न हो, बिना सलाह मत लीजिए। और हर तय जाँच पर जाइए।
हर गोद के पीछे नौ महीने की देखभाल है।
छठा दिन, माँ कात्यायनी: बेटी, किसी की तपस्या का वरदान
यह कथा इस पूरी शृंखला की सबसे सुंदर कथा है। महर्षि कात्यायन निःसंतान थे। उन्होंने वर्षों तपस्या की, और जब माँ प्रसन्न हुईं, तो उन्होंने बेटा नहीं माँगा। उन्होंने माँगा कि माँ स्वयं उनके घर बेटी बनकर जन्म लें। माँ ने वही किया, और कात्यायन की पुत्री होने के कारण कात्यायनी कहलाईं।
हज़ारों साल पुरानी यह कथा उस सोच को सीधे जवाब देती है जो आज भी कई घरों में बची है। संतान की चाह हर दिल में होती है, और जब वो पूरी होती है, बेटा हो या बेटी, वो एक-सी ख़ुशी है।
एक ज़रूरी बात: भारत में भ्रूण का लिंग जानना, बताना या चुनना कानूनन अपराध है, और कोई भी नैतिक clinic यह नहीं करता। IVF का उद्देश्य संतान देना है, लिंग चुनना नहीं।
बेटी, किसी की तपस्या का वरदान है।
सातवाँ दिन, माँ कालरात्रि: अंधेरा एक पड़ाव है, अंत नहीं
माँ कालरात्रि नवदुर्गा का सबसे उग्र और गहरा रूप हैं। पर इनका दूसरा नाम “शुभंकरी” है, यानी शुभ करने वाली। यह रूप अंधेरे से डरने का नहीं, उससे पार जाने का रूप है।
हर सफ़र में कुछ रातें अंधेरी होती हैं। एक असफल IVF cycle, या एक गर्भपात। ऐसे समय में सबसे पहले जो सवाल मन में आता है, वो है: “मुझसे क्या गलती हुई?” इसलिए यह बात साफ़ कहनी ज़रूरी है। शुरुआती गर्भपात के ज़्यादातर मामलों का कारण भ्रूण के अपने chromosome में होने वाली गड़बड़ी होती है, जो किसी के बस में नहीं। सीढ़ी चढ़ने, office जाने, सफ़र करने या एक दिन के तनाव से गर्भपात नहीं होता। इसमें आपकी कोई गलती नहीं है।
आज का एक कदम: दुख को समय दीजिए। एक-दूसरे से बात कीजिए, और ज़रूरत हो तो counselling लेने में संकोच मत कीजिए। जब मन तैयार हो, तब डॉक्टर के साथ बैठकर समझिए कि पिछली बार क्या हुआ और अगली बार क्या बदला जा सकता है। बार-बार गर्भपात हो, तो उसकी अलग से जाँच होती है।
अंधेरा एक पड़ाव है, अंत नहीं।
आठवाँ दिन, माँ महागौरी: विश्राम भी उपचार है
कथा है कि कठोर तपस्या से माँ पार्वती का शरीर श्याम पड़ गया था। भगवान शिव ने गंगाजल से स्नान कराया, और वो फिर से गौर वर्ण में दमक उठीं। तभी से वो महागौरी कहलाईं। तपस्या के बाद विश्राम, थकान के बाद फिर से चमक।
इलाज के लंबे दौर में शरीर और मन, दोनों थकते हैं। कई दंपति एक cycle के तुरंत बाद अगली cycle की ज़िद करते हैं, जैसे रुकना हार मान लेना हो। पर विश्राम कमज़ोरी नहीं, अगली तैयारी है।
आज का एक कदम: पूरी नींद, हल्का व्यायाम, संतुलित भोजन, और एक-दूसरे के साथ ऐसा समय जिसमें बच्चे या इलाज की बात न हो। अष्टमी पर कन्या पूजन में जिन बच्चियों के पैर धोएँगे, याद रखिए, हर बेटी किसी की पूरी हुई प्रार्थना है।
विश्राम भी उपचार है।
नौवाँ दिन, माँ सिद्धिदात्री: आधा शिव, आधी शक्ति, इलाज दोनों का
मान्यता है कि माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव को अर्धनारीश्वर रूप मिला, आधे शिव, आधी शक्ति। सृष्टि का सबसे बड़ा प्रतीक ही यह कहता है कि रचना अकेले नहीं होती।
फिर भी हमारे यहाँ आज भी ज़्यादातर मामलों में पहली जाँच, और अक्सर सारी जाँचें, सिर्फ़ पत्नी की होती हैं। सच यह है कि संतान न होने के लगभग आधे मामलों में पुरुष की ओर से भी कोई कारण होता है, कभी अकेले, कभी स्त्री के कारण के साथ। इसे अनदेखा करके पत्नी का इलाज सालों तक चलता रहता है, और कीमती समय निकल जाता है।
आज का एक कदम: पहली ही मुलाक़ात में पति की semen analysis कराइए। यह कोई अपमान नहीं, ज़िम्मेदारी है। और याद रखिए, कम count का मतलब “नामर्दी” नहीं होता; यह दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
जब भगवान भी आधे-आधे हैं, तो इलाज अकेली पत्नी का क्यों?
विजयादशमी: माँ विदा होती हैं, साथ नहीं छोड़तीं
विजयादशमी को माँ अपने चारों बच्चों, गणेश, कार्तिकेय, लक्ष्मी और सरस्वती के साथ विदा होती हैं। बंगाल और बिहार में यह विदाई ऐसे होती है जैसे बेटी मायके से ससुराल लौट रही हो, आँखों में आँसू और अगले साल लौटने का वादा।
शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक, यह सफ़र नई शुरुआत, धैर्य, डर, उम्मीद, देखभाल, चाह, अंधेरा, विश्राम और साथ से होकर गुज़रता है। कोई दंपति सारे पड़ाव पार करता है, कोई कुछ ही। किसी का सफ़र महीनों का होता है, किसी का सालों का। पर किसी भी पड़ाव पर आप अकेले नहीं हैं।
नौ दिन, नौ कदम: एक नज़र में
| दिन | माँ का रूप | पड़ाव | एक व्यावहारिक कदम |
|---|---|---|---|
| घटस्थापना | जौ और कलश | भ्रूण का विकास | हर विकास का अपना समय है, जल्दबाज़ी नहीं |
| 1 | शैलपुत्री | मज़बूत नींव | दोनों पार्टनर की बुनियादी जाँच |
| 2 | ब्रह्मचारिणी | धैर्य और इंतज़ार | Transfer के बाद घर पर बार-बार test नहीं |
| 3 | चंद्रघंटा | चक्र और ovulation | तीन महीने period की तारीख़ें लिखिए |
| 4 | कूष्मांडा | अंडों का भंडार | तीस के बाद ovarian reserve की बात |
| 5 | स्कंदमाता | गर्भावस्था की देखभाल | पहले से folic acid, बिना सलाह कोई दवा नहीं |
| 6 | कात्यायनी | संतान की चाह | बेटा हो या बेटी, एक-सा आशीर्वाद |
| 7 | कालरात्रि | असफलता और गर्भपात | दोष नहीं, बातचीत और counselling |
| 8 | महागौरी | विश्राम | नींद, हल्का व्यायाम, साथ का समय |
| 9 | सिद्धिदात्री | दंपति का साझा सफ़र | पहली मुलाक़ात में पति की semen analysis |
इलाज चल रहा हो, तो नवरात्रि का व्रत कैसे रखें
यह सवाल हमसे हर साल पूछा जाता है, इसलिए इसका सीधा जवाब:
- अगर आपकी IVF या IUI की दवाएँ चल रही हैं, या आप pregnant हैं, तो निर्जला व्रत मत रखिए। फलाहार वाला व्रत आम तौर पर रखा जा सकता है, पर पहले अपने डॉक्टर से पूछ लीजिए।
- व्रत के कारण कोई दवा या इंजेक्शन मत छोड़िए, और उसका समय भी मत बदलिए। ज़रूरत हो तो डॉक्टर से दवा का समय व्रत के हिसाब से पूछ लीजिए।
- दिन भर पानी, नारियल पानी, दूध और छाछ लेते रहिए। पंडाल की भीड़ और गर्मी में पानी की कमी जल्दी होती है।
- Diabetes या thyroid की दवा ले रही हैं, तो उपवास से पहले उसकी dose पर डॉक्टर से बात ज़रूर कीजिए।
परिवार के लिए: इस नवरात्रि एक सवाल मत पूछिए
नवरात्रि मिलने-जुलने का त्योहार है। पंडाल में, कन्या पूजन में, रिश्तेदारों के घर। और इन्हीं मुलाक़ातों में किसी न किसी के मुँह से वो सवाल निकल ही आता है: “खुशखबरी कब सुना रहे हो?”
आप नहीं जानते कि सामने बैठा दंपति किस पड़ाव पर है। हो सकता है वो इसी हफ़्ते किसी report का इंतज़ार कर रहे हों, या पिछले महीने कुछ खो चुके हों। इस नवरात्रि, यह सवाल मत पूछिए। उसकी जगह बस साथ बैठिए। अगर वो बात करना चाहें, तो सुनिए। देवी पूजा का इससे सुंदर रूप शायद कोई नहीं।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए
- पत्नी की उम्र 35 से कम है और एक साल से नियमित कोशिश के बाद भी गर्भ नहीं ठहरा।
- पत्नी की उम्र 35 या उससे ज़्यादा है और छह महीने की कोशिश के बाद भी गर्भ नहीं ठहरा।
- Periods बहुत अनियमित हैं, नहीं आते, या बहुत दर्द के साथ आते हैं।
- पहले कभी pelvic infection, पेट का ऑपरेशन, या दो या ज़्यादा गर्भपात हो चुके हैं।
- पति को पहले कोई infection, ऑपरेशन, या semen से जुड़ी कोई समस्या रही है।
इनमें से कोई भी बात आप पर लागू हो, तो किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ या प्रजनन विशेषज्ञ से मिलिए, और पति-पत्नी दोनों साथ जाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोई व्रत या पूजा बाँझपन ठीक कर सकती है?
नहीं। व्रत और पूजा मन को शक्ति और धैर्य दे सकते हैं, और वो अपने आप में मूल्यवान है। पर बाँझपन के कारण, जैसे बंद नलियाँ, ovulation की समस्या या कम sperm count, जाँच और इलाज से ही पता चलते और ठीक होते हैं। श्रद्धा और इलाज साथ-साथ चल सकते हैं, एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते।
नवरात्रि में embryo transfer या IVF का इलाज शुरू करना शुभ होता है क्या?
इलाज का समय आपके शरीर के चक्र और hormones से तय होता है, कैलेंडर से नहीं। अगर डॉक्टर द्वारा तय तारीख़ नवरात्रि में पड़ती है, तो बहुत अच्छा। पर किसी “शुभ दिन” के लिए इलाज टालना, ख़ासकर पैंतीस के बाद, सही नहीं।
बाँझपन की जाँच पहले किसकी होनी चाहिए, पति की या पत्नी की?
दोनों की, और साथ में। पति की semen analysis सबसे आसान जाँच है और इससे शुरुआत में ही बहुत कुछ साफ़ हो जाता है।
IVF से होने वाले बच्चे सामान्य होते हैं क्या?
हाँ। IVF में सिर्फ़ अंडे और शुक्राणु का मिलन शरीर के बाहर lab में होता है। उसके बाद भ्रूण माँ के गर्भ में ही बढ़ता है, और दुनिया भर में IVF से जन्मे लाखों बच्चे सामान्य जीवन जी रहे हैं।
इस शृंखला के बारे में: “नौ रूप, नौ पड़ाव” नवरात्रि 2026 (11 से 20 अक्टूबर) के दौरान हर दिन एक छोटे video के रूप में आ रही है। इन videos के दृश्य और आवाज़ AI की मदद से बनाए गए हैं। सारी medical जानकारी डॉ. श्रद्धा चखैयार ने लिखी और जाँची है।
यह लेख केवल जागरूकता के लिए है और किसी डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह की जगह नहीं ले सकता। हर दंपति की स्थिति अलग होती है; जाँच और इलाज से जुड़ा कोई भी निर्णय अपने डॉक्टर से परामर्श करके ही लीजिए।
नौ रूप, नौ पड़ाव। हर पड़ाव पर माँ साथ। शुभ नवरात्रि।
